जीवन विज्ञान जीने की कला सिखाती है: राठौड़, जीवन विज्ञान दिवस मनाया

फतेहपुर शेखावाटी, 27 सितंबर। अणुव्रत विश्वभारती सोसाइटी राजसमंद एवं स्वर्गीय सेठ चंदनमल रायजादा परिवार द्वारा संचालित अहिंसा प्रशिक्षण केंद्र के तत्वाधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तहत आज जीवन विज्ञान दिवस प्रहलाद सिंह राठौड़ स्मृति भवन के प्रेक्षा हॉल में संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य आचार्य राम गोपाल शास्त्री के मुख्य आतिथ्य एवं प्राचार्य नरपत सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में मनाया गया। रविंद्र सिंह राठौड़ द्वारा प्रस्तुत जीवन विज्ञान गीत से कार्यक्रम का शुरुआत किया गया। 

अहिंसा प्रशिक्षक सतीश शांडिल्य ने जीवन विज्ञान दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी दी और यह भी बताया कि जीवन विज्ञान के प्रयोग करने से उसके प्रशिक्षण लेने से व्यक्ति सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ता है। जीवन विज्ञान का प्रशिक्षण लेने वाला व्यक्ति कभी आत्महत्या नहीं करता है। मुख्य अतिथि आचार्य राम गोपाल शास्त्री ने कहा के आचार्य महाश्रमण द्वारा अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का कार्यक्रम सराहनीय कार्यक्रम है। अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य नरपत सिंह राठौड़ ने कहा कि जीवन विज्ञान जीने की कला सिखाती है। जीवन विज्ञान जीवन जीने की शैली है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम अध्यक्ष को जीवन विज्ञान कलेंडर तथा जीवन विज्ञान डायरी पुस्तक देकर प्रशिक्षण केंद्र की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हेमामाली बाड, जसोदा गमेती, पायल मीणा, मुन्ना कोटेड, कोमल कंवर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।