भव्य शोभायात्रा के साथ नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा का शुभारम्भ

प्रथम दिन राम नाम की महिमा एवं कथा माहात्म्य का अनूठा चित्रण


रामगढ़ शेखावाटी, 24 दिसम्बर। आज का दिन कस्बे के लिए ऐतिहासिक रहा। पूरा कस्बा सम्पूर्ण दिवस राममय रहा। कोहरे की गहरी चादर को चीर कर कंपकंपा देवी वाली ठण्ड के बीच ज्योंही सूर्यदेव ने रामगढ़ की धरा पर अपनी छटा बिखेरी, कस्बे में राम स्वर की लहरियां गूंज उठी। जिसे देखो उसका रूख था नटवरजी के मंदिर की ओर। व्यापारियों को भी आज अपने प्रतिष्ठान नहीं खोलने थे, इसलिए सभी पहुंच गए राम नाम से सराबोर भक्तिरस में गोता लगाने के लिए। नजारा था गुरुजी ठण्डाईवाला परिवार की ओर से आयोजित होने वाली रामकथा के शुभारम्भ पर निकाली जा रही शोभायात्रा एवं कलश यात्रा का। करीबन आधा किलोमीटर से अधिक लम्बी शोभा यात्रा में जहां ऊंट पर सवार नगारों की आवाज के साथ शोभायात्रा का नेतृत्व कर रहे थे वहीं घोड़े पर सवार ध्वज लिए बालिकाएं, पीछे-पीछे शानदार स्वर लहरियां बिखेरती बेंडबो की टीम तो बाद में नृत्य करते बालक-बालिकाओं व भक्तों के साथ राजस्थानी चूनड़ी की साड़ी के आकर्षक परिधान में लिपटी व सर पर कलश-नारियल लिए करीबन सवा सौ से अधिक सुहागिने, पीछे-पीछे रघुनाथ जी के मंदिर से आई रघुनाथ जी की पालकी तो एक अलौकिक नजारा प्रस्तुत कर रही थी। उनके पीछे सिर पर रामयाण लिए गुरुजी परिवार के कोलकाता प्रवासी सीताराम शर्मा, इंदौर प्रवासी राधेश्याम शर्मा, दिल्ली प्रवासी बालमुकुंद शर्मा, तुषार शर्मा, आदित्य शर्मा, परिवार की महिलाएं चल रही थी उनके साथ ही उमड़ पड़ा रामगढ़ के गणमान्य नागरिकों, व्यापारियों का सैलाब, और इनके पीछे चल रही थी कस्बे की विभिन्न शिक्षण संस्थाओं द्वारा निकाली गई शानदार झांकियां। शोभा यात्रा मुख्य बाजार होते हुए, रूईया गली, चलावा चौक व बाद में कथा स्थल सप्तऋषि भवन पहुंची। बीच में कथावाचक पं. शम्भूशरण लाटा के अस्थाई आवास स्थल के आगे पं. लाटा ने रघुनाथजी की पालकी की पूजा अर्चना कर पुष्प अर्पित किए। अनेक भक्तों ने पं. लाटा से आशीर्वाद प्राप्त किया। बाद में महिलाओं ने कथा स्थल पर अपने कलश स्थापित किए। 

प्रथम दिन शोभा यात्रा के कारण कथा कुछ विलम्ब से प्रारम्भ हुई। सप्तऋषि भवन के पीछे के विशाल प्रांगण में बनाए गए भव्य एवं आकर्षक पांडाल में व्यास पीठ पर विराजमान वाणी भूषण पं. शम्भूशरण लाटा ने कथा का शुभारम्भ किया। यहां यह बताना जरूरी है कि पं. लाटा अपनी मायड़ भाषा मारवाड़ी में कथा का वाचन कर रहे हैं। प्रथम दिन राम नाम की महिमा व कथा माहात्म्य बड़ा ही सुंदर चित्रण किया। इससे पूर्व उन्होंने व्यास पीठ से ही संत शिरोमणी रतिनाथ जी महाराज को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उल्लेखनीय है कि पं. लाटा मूल रूप से रामगढ़ के निवासी हैं तथा कोलकाता प्रवासी है। यह उनकी 283वीं रामकथा है रामगढ़ में दूसरी बार कथा का वाचन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपनी जन्मभूमि में कथा वाचन कर उन्हें अपार आनंद की अनुभूति हो रही है।


संत रतिनाथजी महाराज के सम्मान में रामगढ़ का बाजार बंद रहा

रामगढ़ शेखावाटी, 24 दिसम्बर। बऊ धाम के पीठाधीश्वर संत शिरोमणि रतिनाथ जी महाराज के गोलोक गमन पर उनके सम्मान में रामगढ़ व्यापार मंडल के आह्वान पर रामगढ़ का बाजार बंद रखा गया। यहां से अनेक भक्त बऊ धाम भी पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।