बहु का मान-सम्मान ही सुखी गृहस्थ जीवन का आधार है: पं. शम्भुशरण लाटा
राम विवाह के रिवाजों ने पांडाल में शादी का माहौल बना दिया
रामगढ़ शेखावाटी, 28 दिसम्बर। नवविवाहिता का मान सम्मान ही गृहस्थ जीवन का आधार है। वर्तमान में सास-ससुर नवविवाहिता मुंह दिखाई के रूप में कीमती उपहार देते हैं लेकिन कौशल्या को जब कोई उपयुक्त उपहार नहीं मिला तो उन्होंने राम का हाथ सीता को सौंप दिया। जब बेटी का पिता अपनी बेटी का हाथ उसके पति के हाथ में सौंप देते हैं तो पति की माता अपने पुत्र का हाथ बहु के हाथ में क्यों नहीं दे सकते। यह कहना है पं. शम्भुशरण लाटा का जो आज कस्बे के चूरू दरवाजा बाहर स्थित सप्तऋषि भवन में गुरुजी ठंडाईवाला परिवार की ओर से चल रही नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के पांचवे दिन राम विवाह के विभिन्न रिवाजों एवं उत्सवों का सजीव चित्रण कर रहे थे। उन्होंने हर रिवाज के प्रसंग के माध्यम से श्रोताओं को संदेश दिया जो उनके उनके सुखद जीवन के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चाहे पति-पत्नी हो, सास-ससुर हो, देवर-जेठ हो सभी को रामकथा से सीख लेनी चाहिए एवं राम के आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए तभी वर्तमान युग में मनुष्य सुख-चैन से जीवन यापन कर सकते हैं। सीता-राम के विवाह के विवाह के विभिन्न रिवाजों के प्रसंगों के दौरान आयोजक परिवार के दिल्ली प्रवासी बालमुकुंद शर्मा के सुपुत्र वागीश एवं पुत्रवधु गुंजन की सीता-राम के रूप में झांकी सजाई तथा उन्होंने एक-दूसरे को माला पहनाई तथ उपस्थित पजिनों ने पुष्प वर्षा की। रामकथा में पधारे रूकनसर नाथ आश्रम के संत कैलाश नाथ महाराज व संत विकास नाथ महाराज भी पधारे। उन्होंने व्यासपीठ व रामचरित मानस की पूजा अर्चना की तथा पं. लाटा का माल्यार्पण किया। बाद में आयोजक परिवार के कोलकाता प्रवासी सीताराम शर्मा, इंदौर प्रवासी राधेश्याम शर्मा, बालमुकुंद शर्मा व राधेश्याम ढ़ण्ड ने संत कैलाशनाथ महाराज व विकास नाथ महाराज को भगवा दुपट्टा ओढ़ाकर उनका सम्मान किया। संत कैलाशनाथ महाराज ने कहा कलियुग में भगवान राम का नाम लेने मात्र पे प्राणी का कल्याण हो सकता है। उन्होंने रामकथा के आयोजक गुरुजी ठंडाई परिवार के सदस्यों को रामकथा के आयोजन पर साधुवाद दिया। इसी दौरान पं. लाटा ने गुरु विश्वामित्र के अयोध्या में ठहरने के प्रसंग को लेकर गुरु की महिमा का बड़ा ही प्रभावशाली विवेचन है। उन्होंने कहा कि गुरु का अस्तित्व अमर होता है। पं. लाटा कथा में जिस आनंद की वर्षा करते है हर प्रसंग में श्रोता जाू आनंद लूटते हैं उसी के चलते आज पांडाल में शादी का माहौल नजर आया और पं. लाटा निर्धारित प्रसंगों तक नहीं पहुंच पाये। विवाह के उत्सव के माहौल में कथा विश्राम के बाद आरती के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ-साथ अल्पाहार भी कराया गया। कथा में आज महिलाओं की संख्या पिछले दिनों की तुलना में काफी अधिक थी। आज पिछले दिनों की तुलना में सर्दी की प्रकोप भी कम होने से श्रोताओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ। उल्लेखनीय है कि कथा आगामी 1 जनवरी तक चलेगी।
आज की सम्पूर्ण कथा यहां देखिए-
पौष बड़ा का प्रसाद लगाया एवं संत रतिनाथजी को श्रद्धांजलि अर्पित की
रामगढ़ शेखावाटी, कस्बे के रघुनाथपुरा मोहल्ले में छतरी वाले बालाजी के पास संत शिरोमणि रतिनाथजी महाराज को श्रद्धांजलि अफित की गई एवं छतरी वाले बालाजी के पौष बड़ा भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।


