जिनका जीवन परहित के लिए होता है, वे ही सबसे बड़े पुण्य के भागी होते हैं: पं. शम्भुशरण लाटा
सीता हरण, जटायु उद्धार व शबरी सहित अनेक प्रसंगों का सजीव चित्रण हुआ
सप्तऋषि सेवा मंडल न्यास ने पं. लाटा को ‘रामगढ़ रत्न’ के खिताब से नवाजा
रामगढ़ शेखावाटी, 31 दिसम्बर। जिनका जीवन परहित होता है वे ही सबसे बड़े पुण्य के भागी होते हैं, उनके शेष कर्म कैसे है, ये सब गौण हो जाते हैं। यह कहना है पं. शम्भंशरण लाटा का जो आज शनिवार को कस्बे के चूरू गेट के बाहर स्थित सप्तऋषि में आयोजित संगीतमय रामकथा के आठवें दिन जटायु द्वारा सीता हरण कर ले जाते रावण को रोकने और रावण द्वारा जटायु को गम्भीर रूप से घायल करने के बाद राम द्वारा जटायु को गोद में लेने के प्रसंग की बड़ी मार्मिक विवेचना कर रहे थे। पं. लाटा ने कहा कि जब जटायु ने कहा कि वह तो मांसभक्षी जीव है, तो राम ने उन्हें परहित जीवन न्यौछावर करने वाला बताया। इससे पूर्व पं. लाटा ने रावण द्वारा बाध्य करने पर मरीची द्वारा स्वर्ण मृग कर राम और लक्ष्मण को सीता से दूर ले जाने और रावण द्वारा सीता का हरण करने आदि प्रसंगों की भी मार्मिक व्याख्या की। बाद में शबरी की अपार भक्ति का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया गया तथा भगवान किस प्रकार अपने भक्त के वश में होते हैं इसकी भी सीख श्रोताओं को दी गई। शबरी के उद्धार के पश्चात सुग्रीव से मिलने, बाली वध एवं सुग्रीव को राजा बनाने की भी संक्षित जानकारी दी। काफी समय बीत जाने के बाद भी सुग्रीव द्वारा सीता के बारे में कोई पता न लगाये जाने पर राम द्वारा क्रोधित होने के प्रसंग में पं. लाटा ने सभी श्रोताओं को जीवन का मूल मंत्र सिखाया। उन्होंने बताया कि क्रोध में लिये गये निर्णये से हमेशा नुकशान ही होता है। हालांकि क्रोध मानवीय स्वभाव है लेकिन क्रोध में कभी निर्णय नही लेना चाहिए। क्रोध में कोई कार्य तुरंत करने का निर्णय लेने की बजाय उस कार्य को भविष्य में करने का निर्णय लेना चाहिए क्योंकि तब तक क्रोध शांत हो जाता है और किसी प्रकार का अनिष्ट नहीं होता। जामवंत द्वारा हनुमान को शक्ति का बोध कराया गया। कथा में आज रैवासा पीठाधीश्वर महाराज राघवाचार्य महाराज ने भी पधार कर कथा श्रवण किया। पं. लाटा द्वारा रामगढ़ कस्बे का नाम गौरवान्वित करने पर सप्तऋषि सेवामंडल न्यास द्वारा पं. लाटा को रामगढ़ रत्न सम्मान से विभूषित किया गया। सम्मान स्वरूप सप्तऋषि सेवा मंडल न्यास के पदाधिकारियों ने उन्हें साफा पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर व अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान करने वालों में राधेश्याम शर्मा, सीताराम शर्मा, राधेश्याम ढंड, पं. रमेश महर्षि, पं. श्रीगोपाल दाधीच, पं. अम्बिका प्रसाद दाधीच, रमाकांत पुजारी, राधाकृष्ण शास्त्री, सुरेश शर्मा, दीपक चोटिया, बनवारी लाल शर्मा सहित अनेक ट्रस्टी व प्रबंध समिति के पदाधिकारी शामिल थे। इसी प्रकार लक्ष्मणगढ़ से पधारे पं. नटवर लाल जोशाी ने संस्कृत भाषा में सम्मान पत्र भेंट कर पं. लाटा को सम्मानित किया। बाद में सप्तऋषि के पदाधिकारियों ने पं. लाटा से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा विश्राम से पूर्व आरती व श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। रविवार को नौवें दिन कथा पूर्ण होनी है अत: कथा साढ़े दस बजे से 2.30 तक चलेगी।
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