कथा के दूसरे दिन महिलाओं की अपार भीड़ उमड़ी
शिव विवाह सहित अनेक प्रसंगों पर हुई सुंदर कथा
पं. शम्भूशरण लाटा की मधुर वाणी ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया
रामगढ़ शेखावाटी, 25 दिसम्बर। कस्बे के चूरू दरवाजा बाहर स्थित सप्त ऋषि भवन में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा में पं. शम्भुशरण लाटा ने सुख दुख की व्याख्या करते हुए बताया कि दुख को हरि इच्छा एवं सुख को हरि कृपा मानकर स्वीकार करना चाहिए। ऋषि अगस्त्य से भगवान शिव व सती द्वारा कथा सुनना, सती द्वारा शंका करना, सती द्वारा भगवान राम की परीक्षा लेना, सती का दुखी होना आदि प्रसंगों की सजीव समीक्षा की। शिव के माध्यम से पं. लाटा ने संसार को संदेश दिया कि दुख के समय अपनी आंखे बंद कर लेनी चाहिए क्योंकि खुली आंखों से जगत दिखाई देता है जबकि बंद आंखों से जगदीश दिखाई देते हैं। इसके बाद सती के पिता दक्ष के यज्ञ एवं शिव की निंदा पर सती द्वारा योगाग्रि में भष्म होना तथा यज्ञ का भंग होने की बड़ी मार्मिक विवेचना की। राजा हिमाचल के घर सती के उमा पार्वती के रूप में पुनर्जन्म एवं पार्वती की तपस्या का भी संगीतमय चौपाइयों के माध्यम से आकर्षक वर्णन किया। बाद में शिव विवाह की मनमोहक प्रस्तुति के माध्यम से पं. लाटा ने श्रोताओं को जीने की कला, दाम्पत्य जीवन के मूल मंत्रों से अवगत कराया। कथा के दूसरे दिन महिलाओं की अपार भीड़ उमड़ी। पांडाल में पूरी कथा के दौरान पं. लाटा की चौपाइयों के साथ गाती रही और झूमती रही। कथा से पूर्व कथा आयोजक गुरुजी ठंडाईवाला परिवार के कोलकाता प्रवासी सीता राम शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी ने आरती व पूजा अर्चना की। कथा में आयोजक परिवार के राधेश्याम शर्मा, बाल मुकुंद शर्मा, तुषार शर्मा, आदित्य शर्मा, इष्टमित्र, रिश्तेदारों सहित मधुसूदन शर्मा, पशुपति कुमार शर्मा, राधेश्याम ढ़ण्ड, पूर्व पालिकाध्यक्ष रमाकांत पुजारी, देवेंद्र कुमार चोटिया, सुरेश शर्मा, ओमप्रकाश चूलेट, रमाकांत काछवाल सहित कस्बे के अनेक गणमान्य नागरिक व प्रवासी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विश्वविख्यात राम कथा वाचक पं. लाटा की यह 283वीं कथा है।
आज की सम्पूर्ण कथा देखिये-


