राम विवाह के माध्यम से जीवन के मूल मंत्रों को सिखाया पं. शम्भुशरण लाटा ने
रामगढ़ शेखावाटी, 27 दिसम्बर। ज्योंही राम ने शिवजी के धनुष को तोड़ा पूरा पांडाल राम के जयकारों से गूंज उठा। यह नजारा था आज चूरू गेट के बाहर स्थित सप्तऋषि भवन में गुरुजी ठंडाईवाला परिवार द्वारा आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के चौथे दिन राम विवाह के प्रसंग में राम द्वारा शिव के धनुष तोडऩे का। इससे पूर्व कथा व्यास पं. शम्भुशरण लाटा ने अनेक रोचक प्रसंगों की विवेचना की। कथा के प्रारम्भ में आयोजक परिवार के कोलकाता प्रवासी सीताराम शर्मा ने अपनी धर्मपत्नी सहित पूजा अर्चना व आरती की। प्रतिदिन की भांति कीर्तन के बाद कथा के प्रारम्भ में पं. लाटा ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा राम लक्ष्मण को असुरों का वध करने के लिए वन में ले जाने की विस्तार से व्याख्या की। बाद में ऋषि विश्वामित्र के साथ दोनों भाइयों का जनकपुरी में जाने और सीता से राम के प्रथम मिलन का वर्णन करते हुए पं. लाटा ने आम आदमी को जीवन जीने के कला सिखाई। यहां यह बताना जरूरी है मायड़ भाषा राजस्थानी में करने वाले पं. लाटा के हर शब्द में गीत और संगीत होता है। न केवल रामचरित मानस की चौपाइयां अपितु अनेक रसीले भजनों के अंश कथा को अत्यंत ही रोचक व रसमय बना देते हैं वहीं आम आदमी के जीवन की रोजमर्रा की घटनाओं का उदाहरण देकर वे श्रोताओं के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ते हैं। जनकपुरी में आयोजित स्वयंबर और धनुष भंग यज्ञ की और इससे पूर्व सीता-राम के अलौकिक सौदर्य का वर्णन उन्होंने जिस ढंग़ से किया वह कथा को अपने आपमें अद्वितीय बना देते हैं। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने आसपास को बताया कि वे हर जगह ही कथा इसी प्रकार करते हैं कि आनंद बरसता है लेकिन रामगढ़ उनकी जन्म स्थली है, उनका बचपन यहीं बीता है, प्रारम्भिक शिक्षा व संगीत शिक्षा उन्होंने यहीं से प्राप्त की है इसलिए रामगढ़ में कथा करने में उन्हें स्वयं के हृदय में अपार आनंद की अनुभूति होती है और यही आनंद वाणी के माध्यम से सभी के बीच बरसता है। कथा के विश्राम पर आरती के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद विरित किया गया। शेखावाटी में भयंकर शत लहर को देखते हुए कथा आज आधा घंटे पूर्व 1.30 बजे प्रारम्भ होकर साढ़े पांच बजे तक चली। आगामी शेष दिनों में भी यही समय रहेगा। कथा में प्रतिदिन भी भांति नगर के अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
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