तृप्ति त्याग से मिलती है, प्राप्ति से नहीं: पं शम्भुशरण लाटा

राम जन्मोत्सव पर हर श्रोता नाचने लगा

सप्तऋषि भवन में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन राम जन्मोत्व की कथा का वाचन करते पं. शम्भुशरण लाटा एवं उपस्थित महिलाएं

सप्तऋषि भवन में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन राम जन्मोत्व पर बधाई के रूप पं. लाटा को शॉल व साफा ओढ़ाते आयोज परिवार के सीताराम शर्मा, राधेश्याम शर्मा व बालमुकुंद शर्मा

रामगढ़ शेखावाटी, 26 दिसम्बर। हर कोई नाचने लगा, क्या पुरुष तो क्या महिला। क्या वृद्ध तो क्या बाल। कुछ बैठे-बैठे ही झूम रहे थे तो कुछ खड़े होकर नाच रहे थे। ये नजारा था आज कस्बे के चूरू दरवाजा बाहर स्थित सप्तऋषि भवन में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन राम जन्मोत्सव के प्रसंग का। इससे पूर्व भगवान शिव ने बताया कि जब-जब धरा पर धर्म की हानि होती है और पाप बढ़ते हैं, भगवान अवतार लेते हैं। रावण जैसे अभिमानी धरा पर पाप फैला रहे थे तो भगवान राम के रूप में अवतरित हुए। इससे पूर्व पं. लाटा ने राजा दशरथ एवं उनकी रानियों का उदाहरण देते हुए आम लोगों के दैनिक जीवन गृहस्थ जीवन के मूल मंत्रों को समझाया। पं. लाटा ने पुत्र प्राप्ति यज्ञ का भी बड़ा सूक्ष्म विवेचन किया। राम जन्मोत्सव में पांडाल में उपस्थित हर श्रोता नाचने-झूमने लगे। भगवान राम के जन्म की बधाई स्वरूप आयोजक गुरुजी ठंडाईवाला परिवार के कोलकाता प्रवासी सीताराम शर्मा, इन्दौर प्रवासी राधेश्याम शर्मा, दिल्ली प्रवासी बालमुकुंद शर्मा ने प्र. लाटा को बधाई स्वरूप शॉल ओढ़ाया एवं साफा पहनाया। नामकरण में तीन त्रिलोकी के नाथ होने के कारण रामचंद्र नाम दिया गया वहीं भरत के नामकरण में त्याग की महिमा बताते हुए पं. लाटा ने बताया कि तृप्ति त्याग से मितली है, प्राप्ति से नहीं। उन्होंने कहा कि जीवन भर त्याग को ही अपना आदर्श माने के कारण भरत नाम दिया गया। व्यक्ति को प्राप्ति की बजाय हमेशा त्याग की ओर ही ध्यान देना चाहिए। इसके बाद पं. लाटा ने भगवान राम की बाल लीलाओं का ऐसा सुंदर चित्रण किया कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। मनुष्य जीवन के हर पहलू को बड़ी सूक्षमता से समझाते हुए उन्होंने वात्सल्य की भी सुंदर व्याख्या की। भगवान राम द्वारा गुरुकुल में रहकर ही अल्प समय में ही सभी प्रकार की शिक्षा से पूर्ण होने का भी विभिन्न चौपाइयों के माध्यम से चित्रण किया। पं. लाटा कथा के दौरान संगीतमय चौपाइयों, भजनों एवं विभिन्न गीतों से कथा को अत्यंत रोचक और रसपूर्ण बना दिया। उल्लेखनीय है कि भजनगायक के रूप में अपने क्षेत्र में प्रवेश करने वाले पं. लाटा की प्रतिभा कथावाचन में अद्वितीय है वहीं वे हारमोनियम वादन के भी विशेषज्ञ हैं। पूरी कथा के दौरान अन्य अन्य वाद्ययंत्रों के साथ वे व्यासपीठ पर ही स्वयं हारमोनियम बजाते हैं। कथा में मुम्बई प्रवासी पं. रमेश महर्षि, मधु शर्मा, श्योपुरा बालाजी धाम के पुजारी संत हरिचरण दास, राधेश्याम ढ़ंड, ओमप्रकाश जौहरी, संतोष सर्राफ सहित गुरुजी ठंडाईवाला परिवार के सदस्य, महिलाएं, परिजन, इष्टमित्र व नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। तीसरे दिन भी महिलाओं की उपस्थिति भारी तादाद में रही।

सर्दी के कारण कथा का समय बदला-अब तक तीन दिन कथा मध्याह्न दो बजे से छ: तक चली। इन दिनों पूरे शेखावाटी में भयंकर शीतलहर का दौर चल रहा है जिसे देखते हुए शेष दिनों में कथा का समय मध्याह्न 1.30 बजे से लेकर सायं साढ़े पांच बजे तक रहेगा।

आज की सम्पूर्ण कथा देखिये-

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राजकीय रूईया महाविद्यालय पारितोषिक वितरण समारोह आयोजित

आर.एन. रूईया राजकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित करते प्राचार्य महेश स्वामी व अन्य

रामगढ़ शेखावाटी, 26 दिसम्बर। सेठ आर एन रूईया राजकीय महाविद्यालय में राजस्थान सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, फ्लैगशिप योजनाओं, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से संबंधित दिनांक 19 से 24 दिसम्बर तक आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे विद्यार्थियों के लिए आज पारितोषिक वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में डॉ. सुरेश कुमार शर्मा, प्रो. नवीन कुमार, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. सुमन कुमारी, प्रो. नानूराम आदि संकाय सदस्यों ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी एवं ऋषिकेश व मुस्कान ने योजनाओं से संबंधित विचार प्रस्तुत किये। प्राचार्य प्रो. महेश कुमार स्वामी ने विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र व पुरस्कार वितरित कर राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। प्रतियोगिता कार्यक्रम समिति की संयोजक प्रो. शारदा इन्दलिया ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके योगदान की सहारना की। पारितोषित वितरण समारोह का कुशल संचालन डॉ. एस. के. सक्सेना ने किया। समारोह के अन्त में डॉ. ज्योति जांगिड़ ने उपस्थित सभी शैक्षणिक व सह-शैक्षणिक स्टाफ के सदस्यों व विद्यार्थियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।