भरत की तरह भक्त को भी चरण पादुका में ही भगवान नजर आते हैं: पं. शम्भुशरण लाटा

दशरथ द्वारा देह त्यागने एवं राम-भरत के मिलन के प्रसंगों की मार्मिक विवेचना की





रामगढ़ शेखावाटी, 30 दिसम्बर। भगवान संसार के हर कण-कण में व्याप्त है, देखने वाला चाहे जिस रूप में देख सकता है। भरत ने राम की चरण पादुका को ही राम माना, उसी प्रकार भक्त भी संसांर की किसी भी वस्तु में भगवान देख सकता है। यह कहना है पं. शम्भुशरण लाटा का जो शुक्रवार को कस्बे के चूरू दरवाजा बाहर स्थित सप्तऋषि भवन में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के सातवें दिन भरत और राम के आलौकिक प्रेम के प्रसंग की विवेचना कर रहे थे। पं. लाटा ने कहा कि जब भरत से यह पूछा गया कि वे राम को वन से वापिस अयोध्या नहीं ले पाये तो भरत ने राम की चरण पादुका की ओर संकेत करते हुए कहा कि उनके लिए तो ये ही राम है। पं. लाटा ने भरत की राम के प्रति अथाह भक्ति, प्रेम और सम्मान का उदाहरण देते हुए उपस्थित श्रोताओं को जीवन के मूल मंत्रों का पाठ पढ़ाया। इससे पूर्व राजा दशरथ द्वारा राम के वियोग में देह त्यागने के प्रसंग का पं. लाटा ने ऐसा सजीव चित्रण किया कि सभी की आंखे बार-बार नम हो गई। राजा दशरथ के देह त्यागते समय श्रवण कुमार को याद करने के प्रसंग के माध्यम से पं. लाटा ने माता-पिता की सेवा का अनूठा ज्ञान श्रोताओं को दिया। इंद्र के पुत्र जयंत द्वारा परीक्षा लेने की नीयत से कौवा बनकर माता सीता के पैरों पर चोंच मारने का भी बड़ा रोचक वर्णन किया। सती अनुयूईया द्वारा ब्रह्मा, विष्णु व महेश को बालक रूप देकर भेजन कराने और लाड-दुलार करने का भी सुंदर चित्रण किया वहीं सुदर भजनों के साथ रामदेवजी महाराज और तेजाजी के आरे में भी श्रोताओं को अवगत कराया। इससे पूर्व 282 रामकथा कर चुके रामगढ़ के ही मूल निवासी जहां अपनी मायड़ भाषा मारवाड़ी में कथा करते हैं वहीं कथा में न कोई चढ़ावा व भेंट लेते हैं और न ही कथा वाचन का कोई शुल्क। कथा में न कोई आडम्बर होता है और न कोई दिखावा या झांकी। विश्वविख्यात कथा वाचक की ये भावनाएं सेठों के रामगढ़ के नाम से विख्यात कस्बे का नाम निश्चित रूप से गौरवान्वित करती है। कथा का आयोजन गुरुजी ठंडाई परिवार के कोलकाता प्रवासी सीताराम शर्मा, इंदौर प्रवासी राधेश्याम शर्मा व दिल्ली प्रवासी बालमुकुंद शर्मा द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राधेश्याम शर्मा विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कस्बे का नाम रोशन कर रहे है, इसीलिए आज कथा में विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा भी पधारे। वे विभिन्न कार्यक्रमों में राजस्थान आए हुए हैं। उनके साथ कथा में विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासचिव परमेश्वर लाल शर्मा, सीकर जिला अध्यक्ष रामगोपाल सुंदरिया सहित अनेक पदाधिकारी भी थे। उन्होंने कुर्सी की बजाय जमीन पर बैठकर कथा सुनना शुरू किया जो पं. लाटा ने उन्हें आग्रह करके व्यासपीठ के पास मंच पर बिठाया। बाद में आयोजक परिवार के सदस्यों सहित विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने पं. लाटा को शॉल ओढ़ाकर व अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया। पं. लाटा ने साफा ओढ़ाकर सुशील ओझा को आशीर्वाद प्रदान किया। कथा में भारत की जानी मानी हस्ती बाबा सत्यनारायण मौर्य भी प्रतिदिन भाग ले रहे हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि रामजन्म भूमि से संबंधित रामलला का नारा देने वाले बाबा ही है। उन्के द्वारा कथा स्थल पर वेदों के संदेशों से संबंधित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है। सातवें दिन महिलाओं के साथ पुरुषों की भी भारी भीड़ देखने को मिली। कथा विश्राम से पूर्व आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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